पिछले माह पश्चिम बंगाल जाना हुआ, देखा कि रेलवे का इन्फ्रास्ट़्रक्चर जितना बिहार और बंगाल में विकसित है, उतना उत्तर में, दिल्ली/उ0प्र0 की तरफ नहीं है । बहुत छोटे स्टेशन भी इधर के खासे बड़े स्टेशनों से बड़े, विकसित और सुविधासम्पन्न हैं, ये फोटो खड़गपुर और जलेश्वर के बीच के छोटे-से स्टेशन'बेलदा' का है, यहां उतर कर मुझे मिदनापुर जिले के सुदूर प्रकृति की गोद में बसे गांव- लालपुर के लिए बस लेनी थी, रेलवे स्टेशन ऐसा लगरहा था जैसे कि हापुड़ या रामपुर के भी नहीं ।
क्या बताऊँ कि मेरे साथ वो क्या-क्या चाहे ..... वो न तितली न वो जुगनू न ही तारा चाहे........
Monday, March 5, 2012
Sunday, March 4, 2012
20वें विश्व पुस्तक मेले, नई दिल्ली में मेरी पुस्तक का लोकार्पण
विश्व पुस्तक मेले में इग्नू सहित तमाम प्रमुख विश्वविद्यालीय पुस्तको के खास प्रकाशक' गुली बाबा प्रकाशन' की स्टाल पर एम0ए0पाठ्यक्रम के लिए मेरी पुस्तक ' उपभोक्ता अध्ययन' का लोकार्पण पर्यावरणविद् श्री विनय कंसल के द्वारा संपन्न हुआ । बीच में हैं- गुल्लीबाबा पब्लिकेशंस प्रा0लि0 के निदेशक श्री दिनेश वर्मा ---
Wednesday, February 29, 2012
आप मिले.....
कई लोगों में अजीब-सा आकर्षण होता है, मिलते हैं तो अच्छा लगता है, कुछ ऐसे------------
आप मिले दिन खिल उठा, आप गए भई रात ।।
आपहि जानो आप में , क्या है ऐसी बात ।।।।।
आप मिले दिन खिल उठा, आप गए भई रात ।।
आपहि जानो आप में , क्या है ऐसी बात ।।।।।
Friday, February 24, 2012
Friday, February 17, 2012
वसंत
वसंत के इस मौसम में कभी गर्व से मुस्कुराते आम के पेड़ को देखिए, मंजरी से लदे महक रहे हैं---
अमराई में घुल रही, मधुमय मादक गंध ।
भंवरों को भाने लगा, यौवन का मकरन्द ।।

अमराई में घुल रही, मधुमय मादक गंध ।
भंवरों को भाने लगा, यौवन का मकरन्द ।।
Thursday, January 26, 2012
इंतज़ार........
जरूरी लंबित कार्य निस्तारण के लिए कुछ दिनो बिजनौर आया हुआ हूं लेकिन गणतंत्र दिवस पर दिल्ली जाना था, बाद में तय हुआ कि नहीं जाऊंगा, मगर यह जानते हुए भी कि मैं नहीं आऊंगा, दिल नहीं माना और उन्हें मेरा इंतजार रहा, इस मौंजूं पर अभी अभी एक दोहा हुआ------
तय था आओगे नहीं, फिर भी बारम्बार ।
हर आहट पर चौंककर, देखा मैंने द्वार ।।
तय था आओगे नहीं, फिर भी बारम्बार ।
हर आहट पर चौंककर, देखा मैंने द्वार ।।
Wednesday, January 25, 2012
गणतन्त्र की 62वीं वर्षगांठ पर
फख्र भी होता है कि हमारे गणतन्त्र को 61 वर्ष हो गए, साथ ही मन उदास भी हो जाता है, कि कहीं बहुत कुछ है जो अभी होना बाकी है, गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ कुछ दोहे आपके लिए---
कैसा ये गण तन्त्र है , कैसा है ये राज ।
जिसकी मरजी तोड़ दे, संविधान को आज ।।
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जिसके पीछे भीड़ है, उसके सिर है ताज ।
देशभक्त को देश में, कौन पूछता आज ।।
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झूठे हैं ये आंकडे़, देश बना खुशहाल ।
बिना दवाई क्यों मरा, फिर गरीब का लाल ।।
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किसको अब तक याद है, लोकतन्त्र का मंत्र ।
गण पर हावी हो गया, आज उसी का तंत्र ।।
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स्वप्न न हो जाए कहीं, देखो ये गणतंत्र ।
कुछ तो सोचो, कुछ करो, रहना अगर स्वतंत्र ।।
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कैसा ये गण तन्त्र है , कैसा है ये राज ।
जिसकी मरजी तोड़ दे, संविधान को आज ।।
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जिसके पीछे भीड़ है, उसके सिर है ताज ।
देशभक्त को देश में, कौन पूछता आज ।।
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झूठे हैं ये आंकडे़, देश बना खुशहाल ।
बिना दवाई क्यों मरा, फिर गरीब का लाल ।।
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किसको अब तक याद है, लोकतन्त्र का मंत्र ।
गण पर हावी हो गया, आज उसी का तंत्र ।।
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स्वप्न न हो जाए कहीं, देखो ये गणतंत्र ।
कुछ तो सोचो, कुछ करो, रहना अगर स्वतंत्र ।।
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Monday, January 23, 2012
वसंत
ज्योंहि मौसम में वासंती बयार बहने लगती है, सर्दी के बावजूद युवा मन में कुछ कुछ होने लगता है, इसी प्रसंग पर करीब दस बरस पहले लिखा, नायिका को केन्द्रित करता मेरा एक दोहा-
बैठ बसंती डाल पर, कोयल कुहके रोज ।
गोरी कब तक ढोएगी, इस यौवन का बोझ ।।
बैठ बसंती डाल पर, कोयल कुहके रोज ।
गोरी कब तक ढोएगी, इस यौवन का बोझ ।।
Sunday, January 15, 2012
धूप की ओट...
मकर संक्रांति के साथ ही मौसम में ऋतुराज बसंत के आगमन की दस्तक होने लगती है,इस खूबसूरत मौसम की शुरूवात पर आप सभी को शुभकामनाएं---------
सूरज दादा ने तजा, अब कोहरे का कोट ।
घर आए ऋतुराज के, लिए धूप की ओट ।।
सूरज दादा ने तजा, अब कोहरे का कोट ।
घर आए ऋतुराज के, लिए धूप की ओट ।।
Saturday, January 14, 2012
मकर संक्रांति की बधाई
आया सूरज मकर में, बढा धूप का ताप ।
मौसम ने हंसकर सुनी, वासंतिक पदचाप ।।
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं.......
मौसम ने हंसकर सुनी, वासंतिक पदचाप ।।
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं.......
Friday, January 13, 2012
Thursday, January 12, 2012
Monday, January 9, 2012
पाला शीत कुहास
इन कडाके की सर्दियों में बडी शिद्दत से अम्मा की याद आ जाती है कि किस तरह रजाई में दुबका कर रखती थीं और सब खाना पीना वहीं बिस्तर पर देती थी कि कहीं सर्दी न लग जाए । हाथ से बुन कर स्वीटर, दस्ताने ,टोपी, मौजे, सभी कुछ तो कितना अच्छा बुनकर पहनाती थी । फिर याद आता है कि क्या उनके बुढापे में, उनकी कमजोरी में मैं भी उतना ही उनका खयाल रख पाया ...और तो और, उनके साथ भी न रह पाया । आज भी यह दर्द सालता है । एक दोहा देखें----
पाला शीत कुहास का, कोई नहीं प्रभाव
बूढी आंखों को खले.., बेटा तेरा अभाव ।।
पाला शीत कुहास का, कोई नहीं प्रभाव
बूढी आंखों को खले.., बेटा तेरा अभाव ।।
Sunday, January 8, 2012
शीत ऋतु की रात
नगर महानगर की चकाचौंध के बीच, सडक के किनारे, रेडलाइट पर, फलाई ओवर के शेड में, पार्क के किनारे कितने नंगे-अधनंगे लोग इस देश की तरक्की और विकास पर नाज कर रहे हैं....उनके लिए कुछ न कर पाने का अफसोस अपनी जगह है-------
उन पर भारी बीतती, शीत ऋतु की रात
सिर पर जिनके छत नहीं, हैं अधनंगे गात ।।
उन पर भारी बीतती, शीत ऋतु की रात
सिर पर जिनके छत नहीं, हैं अधनंगे गात ।।
Saturday, January 7, 2012
रातें ये.....
आजकल की ठिठुरन भरी सर्दियों में उन प्रेयसियों की व्यथा कहता, जिनके प्रियतम ऐसे मौसम में उनसे दूर हैं, एक पुराना दोहा याद आ रहा है---------
रातें ये ठिठुरन भरी, अस्थिय बजत मृदंग
तू भी कोसों दूर है.., अंग छिडी है जंग ।।।
रातें ये ठिठुरन भरी, अस्थिय बजत मृदंग
तू भी कोसों दूर है.., अंग छिडी है जंग ।।।
Friday, January 6, 2012
Wednesday, January 4, 2012
Saturday, December 31, 2011
नया वर्ष शुभ हो
नया साल शुभ हो सखे, हों पूरे अरमान ।
जीवन-पथ पर हर कदम मिले तुम्हें सम्मान ।।
हर दिन हो इस साल का, खुशियों से आबाद
पास फटक पाएं नहीं, जीवन के अवसाद ।।
नित-प्रति और विराट हो, लक्ष्यों का आकाश
कदमों में गतिशीलता, मन में हो विश्वास ।।
आंखों में सपने सजें, अधरों पर मुस्कान
जीवन के संघर्ष में, मिले नई पहचान ।।
सब शुभ हो नव वर्ष में, देश-धरा-आकाश
डर,नफरत ,आतंक का, हो आमूल विनाश ।।
जीवन-पथ पर हर कदम मिले तुम्हें सम्मान ।।
हर दिन हो इस साल का, खुशियों से आबाद
पास फटक पाएं नहीं, जीवन के अवसाद ।।
नित-प्रति और विराट हो, लक्ष्यों का आकाश
कदमों में गतिशीलता, मन में हो विश्वास ।।
आंखों में सपने सजें, अधरों पर मुस्कान
जीवन के संघर्ष में, मिले नई पहचान ।।
सब शुभ हो नव वर्ष में, देश-धरा-आकाश
डर,नफरत ,आतंक का, हो आमूल विनाश ।।
Tuesday, December 27, 2011
Friday, November 18, 2011
Thursday, November 17, 2011
कोहरे में लिपटी मिले...
ऑंखों में जब से घुला, यादों का मकरन्द ।
कोहरे में लिपटी मिले, बस तेरी ही गन्ध ।।
कोहरे में लिपटी मिले, बस तेरी ही गन्ध ।।
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