Sunday, March 31, 2013

एक दोहा

जिनको बेमानी लगे, उसकी-मेरी प्रीत ।  
ऐसे लोगों के लिए, कैसे लिक्खूँ गीत ।।

Friday, March 29, 2013

एक कुण्‍डली

जीवन में खिलते रहें सुन्‍दर सुन्‍दर फूल ।
उन्‍नति पथ से दूर हों कंटक और बबूल ।
कंटक और बबूल, रास्‍ते सुगम बनें सब
आ न सके जीवन में संकट कोइ नया अब
आशाओं के पुष्‍प पल्‍लवित हों आंगन में
खुलें नए सोपान सफलता के जीवन में ।।


Wednesday, March 27, 2013

HAPPY HOLI

जीवन में हर पले सजे, रंग अबीर गुलाल ।
खुशियों की बौछार हो, हर दिन पूरे साल ।
हर दिन पूरे साल, रहे अव्‍वल पिचकारी ..
स्वदस्थ  रहे परिवार, न  हो  कोई  बीमारी ।
यही दुआ है आज..., उदासी रहे न मन में
हर पग हो विस्तार, सफलता का जीवन में ।।

Wednesday, March 20, 2013

एक दोहा

बिना किसी भय लुट रही, अबलाओं की लाज ।    
धन्य धन्य है आपका, यह  भयमुक्त समाज ।।

Tuesday, March 19, 2013

एक दोहा

सपने तो सपने रहे, सपनो का क्या दोष ।
अपने भी सपने हुए, बस इतना अफसोस ।।

Thursday, March 14, 2013

एक दोहा....

अधरों से जब दूर हों, कैसे आए चैन ।   
मदिरा के प्याले भरे, मीत तुम्हारे नैन ।।

Saturday, March 9, 2013

एक मुक्‍तक

भूल जाएंगे..लग रहा हैं हमे  ।।
दिल दुखाएंगे लग रहा है हमे ।।
और कब तक हम इंतजार करें
वो न आएंगे लग रहा है हमें ।।

एक मुक्‍तक

आपके आस पास रहना  है ।
और हमको उदास रहना है  ।
तुम न देखोगे इक नज़र हमको
लेके आंखों में प्‍यास रहना है ।।

Friday, March 8, 2013

एक दोहा

मादक नयनों से तेरे, चख ली थी इक बार ।  
उम्र हुई पर आज तक, उतरा नहीं खुमार ।।

Saturday, March 2, 2013

एक दोहा

पोथी  पर  पोथी  पढी, रोज  गए  इस्‍कूल ।
प्रेम पहाड़ा जब पढा, गए सभी कुछ भूल ।।

Thursday, February 28, 2013

एक दोहा

जब-जब पहले प्यार की, खोली गई किताब ।
पृष्ठों  में  हँसते  मिले, सूखे  हुए  गुलाब  ।।

Wednesday, February 27, 2013

एक दोहा...

संबंधों की डोर को, इतना भी मत खींच ।
हो छत्तिस  का  आँकड़ा,  तेरे मेरे  बीच ।।
                        

Monday, February 25, 2013

एक दोहा



एक टपरिया फूस की, कुछ मीठे अहसास ।
इतनी दौलत और है, अभी हमारे पास ।।

Saturday, October 20, 2012

पुस्‍तक परिचय: कुंवर कुसुमेश द्वारा


पुस्तक परिचय
                                                
पुस्तक का नाम    : मेरे भीतर महक रहा है(ग़ज़ल संग्रह)      ग़ज़लकार : मनोज अबोध 
प्रकाशक          : हिंदी साहित्य निकेतन,बिजनौर          मूल्य  :150/-
प्रकाशन वर्ष       :   2012                                                               पृष्ठ   :96

पिछले लगभग तीन दशकों के दौरान हिंदी में ग़ज़ल के कई संग्रह नज़र से गुज़रे।हिंदी में ग़ज़ल कहने वालों की संख्या में न सिर्फ ज़बरदस्त वृद्धि हुई है बल्कि बहुत अच्छे ग़ज़ल संग्रह भी प्रकाशित हुए हैंऔर हो रहे हैं। इसी श्रृंखला में जनाब मनोज अबोध जी का ताज़ा-तरीन ग़ज़ल संग्रह,मेरे भीतर महक रहा है, मेरे हाथों में है।यह इनका दूसरा ग़ज़ल संग्रह है।वर्ष 2000 में प्रकाशित इनका पहला ग़ज़ल संग्रह,गुलमुहर की छाँव में,काव्य जगत में हाथों-हाथ लिया गया।
प्रस्तुत ग़ज़ल संग्रह,मेरे भीतर महक रहा है, में मनोज जी ने ग़ज़ल के रिवायती अंदाज़ को बरक़रार रखते हुए रूमानी अशआर कहे हैं, तो मौजूदा हालात पर भी क़लम बखूबी चलाई है।
रूमानी अंदाज़ में शेर कहते हुए मनोज कहते हैं कि :-
कुछ वो पागल है,कुछ दीवाना भी।
उसको जाना मगर न जाना भी।
आज पलकों पे होठ भी रख दो,
आज मौसम है कुछ सुहाना भी।- - - - - -  पृष्ठ-27
रूमानी अशआर कहते वक़्त मनोज अबोध की सादगी भी क़ाबिले-तारीफ है।देखिये :-
प्रीत जब बेहिसाब कर डाली।
जिंदगी कामयाब कर डाली।
बिन तुम्हारे जिया नहीं जाता,
तुमने आदत खराब कर डाली। - - - - - - -पृष्ठ-43
मुश्किलों से न घबराते हुए अपना आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए ग़ज़लकार  कहता है कि :-
तमाम मुश्किलों के बाद भी बचेगा ही।
तेरे नसीब में जो है वो फिर मिलेगा ही।---पृष्ठ-26
हालाँकि एक शेर में आगाह भी करते हुए चलते है कि :-
फूल ही फूल हों मुमकिन है भला कैसे ये ?
वक़्त के हाथ में तलवार भी हो सकती है।- -पृष्ठ-93
बहरे-मुतदारिक सालिम में कही गई ग़ज़ल-32 के दूसरे शेर का मिसरा-ए-सानी "बिटिया जब से बड़ी हो गई" ताक़ीदे-लफ्ज़ी की गिरफ़्त में है और हल्की-सी तब्दीली मांग रहा है।देखिये :- 
छाँव क़द से बड़ी हो गई 
एक उलझन खड़ी हो गई।
फूल घर में बिखरने लगे
बिटिया जब से बड़ी हो गई। - - - -  - - - - पृष्ठ-50
इसे यूँ किया जा सकता है:-
फूल घर में बिखरने लगे
जब से बिटिया बड़ी हो गई। 
संग्रह की छपाई बेहतरीन,मुख पृष्ठ आकर्षक और पुस्तक संग्रहणीय है। मनोज अबोध जी के अशआर पढ़ते ही ज़ेहन नशीन हो जाते हैं। मैं दुआगो हूँ कि शायरी के इस खूबसूरत सफ़र पर मनोज जी ताउम्र गामज़न रहें और इसी तरह अपने उम्दा अशआर से अपने चाहने वालों को मह्ज़ूज़ करते रहें।

कुँवर कुसुमेश 
4/738 विकास नगर,लखनऊ-226022
मोबा:09415518546