Monday 31 July 2017

एक मुक्तक

एक मुक्तक ....

चार पल की मुलाक़ात को ।
आपकी हर कही बात को ।
श्वांस से श्वांस का वो मिलन
याद करता हूँ उस रात को ।

Friday 7 July 2017

एक दोहा

एक दोहा आप की नज़्र है---

उन लोगों की बात पर, कैसे करता गौर ।
भीतर से कुछ और जो, बाहर से कुछ और ।।
                   --मनोज अबोध

आज का दोहा


आज के दोहे के साथ आपकी अदालत में----/

करते हैं जो स्वार्थ से, सम्बन्धों की माप ।
पछतावा होगा उन्हें, इक दिन अपनेआप।।

                   --मनोज अबोध

Tuesday 4 July 2017

एक ताज़ा दोहे के साथ...


मेरे भीतर आ  बसा, जब  से  तेरा रूप ।

पोर-पोर में खिल गई, मीठी-मीठी धूप ।।

                              *मनोज अबोध