Tuesday, 17 July, 2012

आज का मुक्‍तक.....


रूकती हुई सॉंसों में कुछ सॉंस मिला जाओ ।
अहसास  के पंछी को थपकी दे सुला जाओ ।
उम्‍मीद  की  राहों  में   यादों  का  उजाला  है..
अश्‍कों की गुज़ारिश है- इकबार तो आ जाओ ।

Monday, 16 July, 2012

आज का मुक्‍तक....

वीणा से  जुदा  होकर  संगीत  नहीं लौटा ।
अधरों से क्‍या बिछुड़ा, फिर गीत नहीं लौटा ।
‘जल्‍दी  लौटूंगा’  ये वादा  भी  छलावा था
बॉंहों से  बिछुड़कर फिर वो मीत नहीं लौटा ।