Saturday, 31 December, 2011

नया वर्ष शुभ हो

नया साल शुभ हो सखे, हों पूरे अरमान ।
जीवन-पथ पर हर कदम मिले तुम्‍हें सम्‍मान ।।

हर दिन हो इस साल का, खुशियों से आबाद

पास फटक पाएं नहीं, जीवन के अवसाद ।।

नित-प्रति और विराट हो, लक्ष्‍यों का आकाश

कदमों में गतिशीलता, मन में हो विश्‍वास ।।

आंखों में सपने सजें, अधरों पर मुस्‍कान

जीवन के संघर्ष में, मिले नई पहचान ।।

सब शुभ हो नव वर्ष में, देश-धरा-आकाश

डर,नफरत ,आतंक का, हो आमूल विनाश ।।

Tuesday, 27 December, 2011

कोहरे का कर्फ्यू लगा

गौरया चुप देखती, बच्‍चे मांगें कौर ।
कोहरे का कर्फ्यू लगा, कब से चारों ओर ।।

जाड़े का इतिहास

ले किरणो की लेखनी, बैठ धूप के पास ।
गौरया लिखने लगी, जाड़े का इतिहास ।।

Friday, 18 November, 2011

डालियॉं

उम्रभर आंधियों से लडीं डालियां
पर रहीं सिर उठाए खडी डालियां
फूल जब अधखिला कोई तोडा गया
बेतरह फूट कर रो पडी डालियां ।।।

Thursday, 17 November, 2011

कोहरे में लिपटी मिले...

ऑंखों में जब से घुला,  यादों का मकरन्‍द  । 
 कोहरे में लिपटी मिले, बस तेरी ही गन्‍ध  ।।










तुम्‍हारे प्‍यार में...

तुम्‍हारे प्‍यार में ये काम कर न जाऊं कहीं ...
तुम्‍हारी याद में घबरा के मर न जाऊं कहीं..
मिला हूं भोर की पहली किरन सा तुमको मैं
मुझे संभाल के रखना,बिखर न जाऊं कहीं ।।

तुम्‍हारे प्‍यार की चादर

तुम्‍हारे  प्‍यार की चादर बिछाए बैठे हैं ।
तुम्‍हारी याद सिरहाने लगाए बैठे हैं ।
तुमसे मिलने के लिए,  आंसू भी....
कब से पलकों पे आए  बैठे  हैं ।।।।।

Sunday, 6 November, 2011

एक मुक्‍तक

मेरा होता नहीं, तो क्‍या होता...
ऐसे डर से भला नहीं होता ।
जो नहीं खुद का कभी हो पाया
वो किसी और का नहीं  होता ।।

Sunday, 23 October, 2011

दीपावली शुभ हो

दीवाली शुभकामना,  स्‍वीकारो  श्रीमान ।।।

पथ प्रशस्‍त हों आपके, भरा रहे धन-धान ।।
 


सभी मित्रों को, सपरिवार, इष्‍टमित्रों, परिजनो सहित प्रकाश पर्व की मंगल कामनाएं ।।।।

Sunday, 9 October, 2011

एक मुक्‍तक

आपने याद हमको किया,  शुक्रिया ।
आपने हमको अपना कहा, शुक्रिया ।
कौन कब साथ देता है किसका यहां
आपने साथ इतना दिया,  शुक्रिया ।

Sunday, 7 August, 2011

मित्रता दिवस पर शुभकामनाएं ।।।।।।।।

दिवस मित्रता के लिए, सिर्फ बरस में एक ।
करना चाहूं मित्र का, मैं हरदिन अभिषेक ।।

मित्र, मित्रता का दिवस, सबका ये पैगाम ।
जीवन में यदि आ सके, मित्र मित्र के काम ।।

चिरजीवी हो मित्रता, चिरजीवी हो मित्र  ।
दिखलाना मत मित्र का, माला अर्पित चित्र ।।

Friday, 5 August, 2011

हमें नसीब तेरे इश्‍क के सिवा क्‍या है

हमें   नसीब   तेरे   इश्‍क  के सिवा क्‍या है
ये और बात, हमें इश्‍क में मिला क्‍या है

तुम्‍हारी उम्र लगे मुझको, ये कहा न करो
जो ये दुआ है,  बता और बद्दुआ क्‍या है

तेरी तलाश,  तेरी फिक्र,    आरज़ू तेरी
इसे न प्‍यार कहूं तो तुही बता, क्‍या है

वो पेड़ सूख गया कैसे जो हरा था कल
बताए कौन भला अब कि माज़रा क्‍या है

करेगा आकलन कैसे,  तुम्‍हे नहीं मालूम
नज़र में उसकी बुरा क्‍या है या भला क्‍या है

तेरे करीब रहूं पर तुझे न देख सकूं
यही इनाम अगर है तो फिर सज़ा क्‍या है

चला गया जो कहीं दूर फिर मिलेगा कब
'अबोध' रोक उसे बढ़के, सोचता क्‍या है

Thursday, 5 May, 2011

ऐसा भी वक्‍त था....

सिर शान से उठाये

सदियों से हम खड़े थे
तूफान हो कि बारिश,

हम किससे कब डरे थे

सूखी लताएं पत्‍ते,

बस ठूंठ रह गए अब
इक ऐसा वक्‍त भी था

हम भी हरे भरे थे...

Friday, 25 March, 2011

एक मुक्‍तक

दर्द का सिलसिला भी नहीं

कोई शिकवा गिला भी नहीं ।

कोशिशें भी न ज्‍यादा हुईं

आप जैसा मिला भी नहीं ।।

दोहा

राह निहारूं दिन-बरस, गया नयन जल रीत ।

कितने मौसम प्रेम के, गए तिरे-बिन बीत ।।

बनने मत देना कभी, मन में कोई भीत ।

जब कोई शंका उठे, खुलकर कहना मीत ।।