Friday, 25 March, 2011

एक मुक्‍तक

दर्द का सिलसिला भी नहीं

कोई शिकवा गिला भी नहीं ।

कोशिशें भी न ज्‍यादा हुईं

आप जैसा मिला भी नहीं ।।

3 comments:

विनोद पाराशर said...

बहुत ही सुंदर मुक्तक अबोध जी!

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

हमारे जैसा कोई मिलेगा भी नहीं।

ज्योति सिंह said...

waah zabardast rahi