Friday, 17 March, 2017

न जाने कैसे

अच्छे से याद है मुझे
कमरे में घुसते ही
सटाक से कर लिया था दरवाज़ा बन्द
चढ़ा दी थी चिटकनी
लगा दी थी कुण्डी
कि/ चाह कर भी कोई
भीतर न आ सके ।
मगर न जाने कैसे...कब
मेरे साथ-साथ
बिस्तर तक चले आये
कई दुःख, कई चिन्ताएं
क्रोध के रेतीले झोंके
ईगो, पश्चाताप और यादें
उफ़...
एक मुलायम बिस्तर में
इतने कठोर सहवासी
वो भी इतने सारे...?
एकाएक आँखों में उग आई नागफ़नी
और/ करवटें बदलता रहा
मैं रातभर ..।।।।

रिजेक्शन

दिलकश स्टाइल में
बाँध-गूँथ कर
महकते फूलों के
गुलदस्ते बेचते
माली की टोकरी में
बचे पड़े फूलों से पूछो-
क्या होता है
"रिजेक्शन" का दर्द !

बड़े से शो-रूम में
फोकस लाइटों के बीच
'न्यू अराइवल' के डिस्पले तले
करीने से हैंगर में इठलाती
खूबसूरत ड्रेस को
बड़े चाव और पसंद से
उठा लेने के बाद
प्राइज टैग
साइज़ की फिटिंग
या फिर
और बेहतरीन की चाहत में
गूचड़-माचड़ कर
स्टैंड या टोकरी में
वापस फेंक दिए जाने पर
उस ड्रेस से पूछना-
क्या होता है
"रिजेक्शन" का दर्द !

रूप, गुण, पसंद और
ट्रेण्ड के बावजूद
नकारे जाने की पीड़ा
नकारने वाला शायद ही
कभी समझ पाता हो ।।।

Sunday, 12 March, 2017

होली

होली शुभ हो आपको, खुशियाँ मिलें अपार ।
तन मन पर छायी रहे, रंगों- भरी  बहार ।।
रंगों  भरी  बहार ,  हँसो- नाचो -लहराओ
"प्रिय" के गालों पर, अबीर गुलाल लगाओ
यदि हों "वो" नाराज़, बना लो  सूरत भोली
हाथ जोड़ कर कहो, आपको हो शुभ होली!