Thursday, 28 February, 2013

एक दोहा

जब-जब पहले प्यार की, खोली गई किताब ।
पृष्ठों  में  हँसते  मिले, सूखे  हुए  गुलाब  ।।

1 comment:

MANU PRAKASH TYAGI said...

ये दो लाइने काफी कुछ कह गयी