Saturday, 7 April, 2012

आज का मुक्‍तक......

जब भी लेखन की बात होती है ।
इसको शह, उसको मात होती है ।
वो दलित, मैं सवर्ण,  तू नारी....
लेखकों की भी ‘जात ‘ होती है ।

3 comments:

शिखा कौशिक said...

बिलकुल सही mudda उठाया है इस मुक्तक के माध्यम से -लेखक की कोई जाती नहीं होती .आभार
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शिखा कौशिक said...

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anju(anu) choudhary said...

और ये ही पक्षपात का आधार होती हैं ....