Saturday 12 October 2013

एक मुक्‍तक.....

दुर्गाष्‍टमी,महानवमी और विजय दशमी पर सभी मित्रों को ह्रदय से मंगलकामनाएं----

अन्‍तर की शक्तियों को जगाने की रात है ।
श्रद्धा से शीश अपना झुकाने की रात है  ।
देकर के अर्घ्‍य अश्रुओं का,हाथ जोड़कर
सच्‍चे ह्रदय से मॉं को मनाने की रात है ।।
-----मनोज अबोध

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ब्लॉग पर लेखन जारी रखिए।
आप अच्छा लिखते हो।