Saturday, 14 January, 2017

एक कविता

हाँ, मुझे पसंद है
यायावरी
घूमना-फिरना, सैर-सपाटा
पर्यटन
टोहना अनजान रास्तों को
महसूसना भिन्न संस्कृतियों को
देखना /अलग अलग़ जीवन शैलियों में
रचे बसे लोगों को !
गले मिलना/ प्रकृति के विविध रूपों से
बेहद पसंद है मुझे !!!
लेकिन ???
बेतरतीब, बेमानी,दिखावटी
रिश्तों को ढोते झुण्ड के साथ तो बिलकुल भी नहीं।
बौद्धिक तार्किकता
वैचारिक समरसता
और / आयनिक सकारात्मकता के साथ
भले ही, सिर्फ़ एक साथी हो
सफ़र का पल पल
अक्षुण्ण अनुभव में बदल जाता है
फिर थकते नहीं हैं क़दम
बढ़ते जाते हैं एक नई ऊर्जा के साथ
खंगालने को एक नई दुनिया
एक नए अहसास के साथ।
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1 comment:

RUBY said...

उम्दा रचना