Sunday 28 April 2013

एक ग़ज़ल

यूँ तो लोग हजार मिले
तुम जैसे दो-चार मिले

अक्स तो अपना छोड़ा ही
जिससे हम इकबार मिले

उसको क्या दरकार भला
जिसको माँ का प्यार मिले

चाहत,  नफरत,  हमदर्दी 
कुछ तो आख़िरकार मिले

प्रेमकथा दो शब्दों की ?
कुछ इसको विस्तार मिले

चाह बहुत थी मिलने की
मिलके लगा बेकार मिले
 --------  मनोज अबोध

Monday 22 April 2013

आज की ग़ज़ल--------------------------

रास्ता पग पग मिला काँटो भरा करता भी क्या
मुझको तो हर हाल में चलना ही था करता भी क्या

मुझको कब  मालूम था सच बोलना अपराध है
माननी मुझको पड़ी अपनी ख़ता करता भी क्या

मैं न तो घर का ही रह पाया न पूरा घाट का
मेरी गलती की मिली मुझको सज़ा करता भी क्या

नींद का आँखों से रिश्ता निभ न पाया उम्रभर
भाग्य में था रतजगा ही रतजगा करता भी क्या

उसके हाथों कत्ल होने के सिवा चारा न था     
ये गलत था तो जरा तू ही बता, करता भी क्या

साँस लेना भी वहाँ दुश्वार था मेरे लिए
दूर तक थी सिर्फ ज़हरीली हवा, करता भी क्या
----------------- मनोज अबोध--------------

Sunday 21 April 2013

आज की ग़ज़ल-----------------

वही सुंदर-सा सोफा, वो ही दीवारें, वो घर तेरा
मैं सोया हूँ मगर सपना रहा है रात-भर तेरा

मेरी आँखों से आँसू छीन लेना ठीक है, लेकिन
कहीं का भी नहीं छोड़ेगा तुझको ये हुनर तेरा
                 
उसी को चोट दे बैठा जिसे अपना कहा तूने
उठेगा अब किसी के सामने कैसे ये सर तेरा

नज़र मंज़िल पे औ’ रफ्तार पे काबू भी रखना है
न बन जाए सुहाना ये सफर, अंतिम सफर तेरा

किसी मजलूम पर हो जुल्म, तू खामोश रह जाए
तुझे फिर चैन से  जीने  नहीं  देगा  ये डर तेरा

जमाना हो गया तूने छुआ था मुझको अधरों से
अभी तक है मेरे अहसास में बाकी असर तेरा

Friday 19 April 2013

आज की ग़ज़ल----------------------------

नाव तूफान से यूँ पार भी हो सकती है
और कोशिश तेरी बेकार भी हो सकती है

फूल ही फूल हों, मुमकिन है भला कैसे ये?
 वक्त के हाथ में तलवार भी हो सकती है

बोलकर ही नहीं हमला किया जाता हरदम
तेरी चुप्पी तेरा हथियार भी हो सकती है

यूँ न मायूस हो तू, दिल को जरा ढाढस दे
ये तेरी प्रार्थना स्वीकार भी हो सकती है

मुतमइन इतना भी होना न कभी रस्ते में 
सामने इक नई दीवार भी हो सकती है

आपको कोई भी अच्छा नज़र नहीं आता  
ये नज़र आपकी बीमार भी हो सकती है

Tuesday 16 April 2013

आज की ग़ज़ल---------------------------

भीड़ में खो गए आप भी
अजनबी हो गए आप भी

जी न पाएँगे, तय बात है
छोड़कर जो गए आप भी

जागने की सुनाकर सज़ा
चैन से सो गए आप भी

क्या कहा, प्यार है आपको
फिरतो समझो गए आप भी

फोन करना, न मिलना कभी
ऐसे क्यों हो गए आप भी

फूल आया न कोई भी फल
बीज क्या बो गए आप भी

Monday 15 April 2013

आज की ग़ज़ल--------------------------

ज्या्दा थे क्या ग़म बाबा
आँख हुई जो नम बाबा ।

अब की उससे बिछड़े तो
दर्द हुआ कुछ कम बाबा।

जनमों के रिश्तों की कब
आँच रही क़ायम बाबा ।

अब तो मिलते हैं अक्सर
फूलों में भी बम बाबा ।

वक्‍़त पड़ा जब यारों से
टूट गए कुछ भ्रम बाबा।

मुश्किल है बचना अब तो
अपना दीन-धरम बाबा।

टूटे, पर कब बिखरे हम
झेले लाख सितम बाबा।

मौत डराती क्या हमको
जि़न्दा थे कब हम बाबा।

Thursday 11 April 2013

भारतीय नववर्ष- नवसंवत्‍सर 2070 की शुभकामनाएं

जीवन में सफलता का  संघर्ष  सकल  शुभ हो ।
सद्कर्म,साहित्‍य,सृजन,उत्‍कर्ष सकल शुभ हो ।
सुख,समृद्धि,यश,वैभव पग चूमें सदा प्रियवर...
नूतन  स्‍पर्श-भरा   नव वर्ष  सकल  शुभ  हो ।।

Thursday 4 April 2013

एक दोहा

कुछ उपजाऊ जोत तो, ली ठाकुर ने छीन ।
कोट-कचहरी चढ़ गई, बाकी बची जमीन ।।